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साइंस लैब

किशोरावस्था की खोज किसने की?

 

क्या आप जानते हैं कि किशोरावस्था की खोज सबसे पहले अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जी. स्टैनली हॉल ने में 1904 में की थी।

“किशोरावस्था का अंग्रेजी शब्द “अडोलेसेन्स” पहली बार 15 वीं शताब्दी में इस्तेमाल किया गया था लेकिन हॉल ने इस फेज की खोज 1904 में की थी। “अडोलेसेन्स” लैटिन शब्द “अडोलेसेर” से आया, जिसका अर्थ है “बड़ा होना”। अपने काम में हॉल ने किशोरावस्था के कई अलग-अलग पहलू समझाए।

लंबे पैर वाले जीव

सबसे पहले एक मज़ेदार फैक्ट! हॉल ने टीनएज के दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों का एक बहुत अनोखा विवरण दिया है। उन्होंने बताया कि शरीर के अलग अलग अंग अलग अलग तरह से बढ़ते है और उनमे से सबसे जल्दी बढ़ती हैं हमारे टाँगे। तो यूँ ही हमारे बड़े अक्सर हमसे नहीं कहते – क्या घोड़ों जैसे टाँगे हो गई हैं!

मूड स्विंग बेशुमार 

हाँ सिर्फ आपके मम्मा-पापा ही आपके मूड स्विंग से वाकिफ नहीं है। हॉल ने इनकी खोज 1904 में ही कर ली थी। उन्होंने बताया कि इस उम्र में उदास होना सबसे ज़्यादा सामान्य होता है। उन्होंने कहा कि “निराशा की अवस्था ग्यारह साल की उम्र से शुरू होती है, पंद्रह तक लगातार और तेजी से बढ़ती है, फिर तेईस तक स्थिर हो जाती है।” तो आप सभी टीन्स थोड़ा धीरज रखें। अगर चीज़ें आपको अभी अच्छी नहीं लग रही हैं तो ये जल्द ही बेहतर होने वाली हैं। पर फ़िलहाल इसका दोष आप टीनएज पर डाल सकते हैं!

एड्रेनालाईन का घड़ा 

तो चलो अब थोड़े एक्ससाइटमेंट की ओर बढ़ते हैं। हॉल ने कहा था कि इस उम्र में नई और रोमांचक चीज़ों को आज़माने की चाह बहुत ज़्यादा होती है। जीवन के और किसी भी फेज़ में ये रोमांच और नए अनुभवों की चाह इतनी नहीं होती जितनी टीनएज के बढ़ते समय में होती है। और ऐसे समय में टीनएजर्स से सामान्य या बोरिंग पैटर्न बिलकुल भी झेले नहीं जाते हैं। 

चलो ये तो हम सभी मानते हैं, है ना?

मीडिया से सावधान 

मिस्टर हॉल का कहना था की टीनएजर्स के दिमाग पर मीडिया का बहुत ज़्यादा असर पड़ता है और तब तो वह बस समाचार पत्र की बात कर रहे थे! उन्होंने कहा कि युवा दिमाग मीडिया से प्रभावित हो जाते हैं और उनका सबसे ज़्यादा असर युवाओं की भावनाओँ पर होता है।

वाह! सोचो मिस्टर हॉल समाचार पत्रों और पुस्तकों को लेकर इतना चिंतित थे तो वे आज सोशल मीडिया देख कर क्या कहते! लेकिन यहां मुख्य बात यह है कि मीडिया अक्सर गलत चीजों को सही ठहरा सकता है और चीजों को हमारी नज़रों में थोड़ा ज़्यादा बेहतर जता सकता है। तो मीडिया में सुनी हर एक बात को एकदम से सच ना मानें!

तनाव का टाइम 

हॉल ने ही सबसे पहले किशोरों को होने वाले तनाव के बारे में बात की थी! ये बात काश कोई हमारे मम्मा-पापा और टीचर्स को भी बता देता, है ना! हॉल ने बताया कि इस उम्र में टीनएजर्स का झुकाव बड़ो की बात ना मानने और सबके खिलाफ जाने की तरफ़ ज़्यादा होता है। तो आज सुबह मम्मी के साथ लड़ाई का कारण अब आप जानते हैं। सब टीनएज की गलती है!

तनाव का टाइम

क्या आपके पास साइंस लैब के लिए कोई प्रश्न हैं? उन्हें नीचे टिप्पणी बॉक्स में पोस्ट करें। हम अपने आगामी लेखों में उन्हें जवाब देंगे। कृपया कोई पर्सनल जानकारी न डालें। 

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