'अगर मेरी बात पर किसी ने विश्वास न किया तो?'

By: Shreya Mishra

समीर (14) कुछ दिनों से किसी से भी बात करने से बच रहा है। उसकी बचपन की दोस्त नेहा ने ठान लिया है कि वो उसके मन की बात निकलवा कर रहेगी। क्या समीर नेहा को सब बताएगा? जानने के लिए पढ़िए उनकी कैंटीन टॉक।

अगर मेरी बात पर किसी ने विश्वास न किया तो?

दिल पर भार  

“अरे समीर! कहाँ यार! मैंने तुम्हें कैंटीन में बरसों से नहीं देखा!" नेहा ने समीर को कैंटीन की तरफ आते देख पूछा । 

“नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं है। वो मुझे स्कूल का बहुत काम था तो मुझे सच में समय नहीं मिल पाया", समीर ने कहा।

नेहा ने कहा, "ओह प्लीज़! मुझसे झूठ तो मत ही बोलो, हम दोनों एक ही क्लास में हैं और आजकल तो तुम कुछ खेल भी नहीं रहे हो तो तुम्हारा कोई काम भी  नहीं छूटा है। और तुम बहुत परेशान भी लग रहे हो जैसे किसी से छुप रहे हो।”

नेहा सही थी। समीर कुछ दिनों से परेशान था और पिछले कुछ हफ्तों से लंच के लिए कैफे जाने से बच रहा था। उसने अभी तक किसी से इस बारे में बात नहीं की थी और वो सच में नेहा को सब कुछ बताना चाहता था पर डर रहा था।

लेकिन नेहा के पूछने पर उससे रुका नहीं गया, "हाँ एक बात है जो मुझे कुछ समय से परेशान कर रही है। पर तुम्हें वादा करना होगा कि तुम ये बात किसी को नहीं बताओगी। किसी को भी नहीं!"

अजीब महसूस होता है 

"हाँ, हाँ ठीक है। वैसे भी मैंने ऐसा कब किया हैं? अच्छा चलो अब बताओ कि हुआ क्या है?" नेहा ने आराम से पूछा।

"हमारे पड़ोस में एक अंकल है जो हमारे घर आते जाते रहते हैं। मुझे लगता है कि वह कुछ दिनों से मेरे नज़दीक आने की कोशिश कर रहे हैं। वो मुझे बार बार गले लगाने की और किस करने की कोशिश करते हैं। और मैंने जब ये दर्शाया कि मुझे ये सब नहीं पसंद तो उन्होंने उसे हँसी में उड़ा दिया। मैं जानता हूँ वो हमसे बड़े हैं पर मैंने इसके बारे में बहुत सोचा है और मैं ऐसा बिना किसी बात के नहीं कह रहा हूँ। पर वो मुझे बहुत अजीब महसूस कराते हैं जो मुझे बिल्कुल भी पसंद नहीं है”, समीर ने नर्वस हो कर कहा।

"अरे! तुमने मुझे पहले क्यों नहीं बताया? तुम ठीक तो हो न? क्या तुमने ये बात अपने मम्मी-पापा को बताई" नेहा ने पूछा। 

"नहीं। मुझे इस बात का डर है। अगर उन्हें मेरी बात पर विश्वास नहीं हुआ तो? वो मेरे पापा के दोस्त है यार। कहीं उन्हें ऐसा न लगे कि मैं ज़्यादा सोच रहा हूँ या उनकी अटेंशन के लिए ऐसा कर रहा हूँ।"

"ये बात मुझे बहुत परेशान कर रही हैं और इस वजह से मैं टेंशन में भी हूँ", समीर ने उदास चेहरे के साथ कहा। 

कहना ज़रूरी हैं 

"वे तुम्हारे मम्मी-पापा हैं समीर, उनसे से बात करो और बताओ कि तुम कैसा महसूस करते हो। बस शांत रहना और अपनी बात ठन्डे दिमाग से कहना। मुझे यकीन है कि वो लोग तुम्हारी बात ज़रूर समझेंगे”, नेहा ने सलाह दी।

"हाँ, शायद तुम सही कह रही हो। मैं आज ही उनसे बात करता हूँ”, समीर ने जवाब दिया। "कम से कम मेरा दिल तो हल्का होगा"।

"और मैडम आपका भी शुक्रिया। मुझे नहीं पता था कि तुम कभी कभी काम की बातें भी करती हो ;)" उसने नेहा को चिढ़ाया।

"ओ हेल्लो! मैं बहुत अच्छी हूँ, ठीक है ना? और प्लीज़ मुझसे वादा करो कि तुम अब कैंटीन में वापस आओगे। क्योंकि मैं इन गॉसिप गर्ल्स को एक और दिन नहीं झेल सकती”, नेहा ने लड़कियों के एक झुण्ड की ओर इशारा करते हुए कहा।

इस बात पर अगली क्लास की घंटी बज गई और वो दोनों हँस कर क्लास की तरफ बढ़ गए। 

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