क्या बच्चों को सेक्स के बारे में बताना चाहिए?

By: Niyatii N Shah

जब यौन शिक्षा की बात आती है, तो लगभग सभी माता-पिता ये मानते हैं कि इससे परहेज़ करना ही बेहतर हैं। वे नहीं चाहते कि उनके बच्चे सेक्स से संबंधित किसी भी तरह की गतिविधि का हिस्सा बने या उसके बारें में कुछ भी जानें। लेकिन क्या ये सही है? क्या यौन शिक्षा के बिना किशोरों का वयस्कता की तरफ बढ़ना सुरक्षित है? यौनिकता शिक्षक नियति शाह आज इसी बात पर चर्चा कर रही हैं।

बच्चे और यौनिकता 

अक्सर मेरे काम में, माता-पिता इस तरह के प्रश्न पूछते हैं:

 "मैंने अपने टीनएजर को मास्टरबेट करते हुए पकड़ा, अब मुझे क्या करना चाहिए?"

"मेरा बच्चा सोशल मीडिया पर अजनबियों के साथ चैट कर रहा है और कोई बात नहीं सुन नहीं रहा है।"

“मेरी बेटी कहती है कि वह कभी बच्चे पैदा नहीं करना चाहती क्योंकि उसमे बहुत दर्द होता है। मैं उसका मन कैसे बदलूँ?”

जब मैं उन्हें बताती हूँ कि उनकी सभी समस्याओं का जवाब यौन शिक्षा है, तो अचानक एक अजीब सी ख़ामोशी छा जाती है।

जी हाँ। लगभग सभी माता-पिता ये मानते हैं कि वो यौन शिक्षा से परहेज़ ही हैं, यानी उनके बच्चे न तो सेक्स से संबंधित किसी भी तरह की गतिविधि का हिस्सा बने या उसके बारें में कुछ भी जानें।

वे मुझसे कहते हैं, "बस ये सुनिश्चित करें कि उसे ये समझ में आ जाए कि उसे ऐसी किसी भी गतिवधि का हिस्सा नहीं बनना है!"

मैं समझती हूँ, हम सभी चाहते हैं, कि हमारे बच्चे सुरक्षित रहें। अजनबियों से, अनचाहे गर्भ से, दिल टूटने और ऐसे कई खतरों से। कई माता-पिता यह भी चाहते हैं कि उनके बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर पर ही ध्यान दें और इसलिए भी यौन शिक्षा से दूर भागते हैं।

लेकिन क्या यह ठीक है? संक्षिप्त जवाब - नहीं। मनुष्य यौनिक प्राणी हैं, बच्चे मनुष्य हैं, इसलिए बच्चे भी यौनिक प्राणी हैं। 

अगर हम उनसे कहें कि उन्हें प्यार या आकर्षण के बारे में नहीं सोचना चाहिए, तो क्या हमारे बच्चे नए लोगों की तरफ आकर्षित नहीं होंगे? उन से बात नहीं करेंगे? मन में उमड़ रही नई भावनाओं को नहीं टटोलेंगेें? क्या वे नई चीज़े आज़माना छोड़ देंगे? नहीं!

तो, पहला कदम हैं - इस बात को को समझना और अपनाना। हमारे बच्चे जैसे जैसे बड़े होंगे, उनमें प्रेम, आकर्षण और सेक्स को लेकर उत्सकता ज़रूर बनेगी। दूसरा कदम हैं - उनको इस परिवर्तन के लिए तैयार करना, सुरक्षित रहने में उनकी मदद करना और स्वतंत्र, खुश और स्वस्थ वयस्क बनने में उनका साथ देना।

यौन विकास 

अगली बात जो मैं अभिभावकों से कहती हूँ, वह यह है, कि उन्हें किशोरावस्था में हो रहे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों के बारे में अवगत रहना चाहिए। 

अक्सर माता-पिता बच्चों की शिक्षा और करियर पर इतना केंद्रित रहते है कि किशोरावस्था के इस पहलु को अनदेखा कर देते हैं।

इन बदलावों से अवगत रहने से आपको अपने किशोरों को बेहतर समझने में मदद मिलेगी। एक बार जब आप समझ जायेंगे हैं कि वो क्या महसूस कर रहे है, तभी आप उनकी मदद करने के तरीके सोच सकते हैं। और ऐसे कई बदलाव जिनके बारें में हम शायद कभी नहीं सोचते! 

10-13 वर्ष (प्रारंभिक किशोरावस्था)

  • ज़्यादातर लड़कियों के लिए यौवन (प्यूबर्टी) 9 से 12 वर्ष की उम्र के बीच शुरू होता है। 
  • लड़कों के लिए ये 11 की उम्र के आसपास शुरू होता हैं।
  • लड़कियों और लड़कों के प्यूबिक बाल बढ़ते हैं और उनके जननांग भी बढ़ते हैं।
  • कुछ किशोरों का यौवन के दौरान वजन बढ़ सकता है।
  • लड़कों का शरीर स्पर्म बनाना शुरू कर सकता है।
  • लड़कियों को पीरियड्स शुरू होते हैं।
  • यौन गतिविधियों के बारे में जिज्ञासा विकसित होने लगती है।
  • कुछ किशोर चुंबन जैसी गतिविधियां आज़माना चाहते हैं।
  • उन्हें नई शब्दों की जानकारी मिलती हैं - सेक्स, समलैंगिकता (होमोसेक्सुएलिटी), रेप आदि
  • बच्चे यौन शब्दों पर चर्चा कर सकते हैं या यौन चुटकुले साझा कर सकते हैं।
  • वे यौन सामग्री ऑनलाइन देख सकते हैं।

14-18 वर्ष (देर से किशोरावस्था)

  • कुछ किशोर अपने शरीर में होने वाले बदलावों से संघर्ष कर रहे होंगे 
  • अपने शरीर और रूप को लेकर परेशान महसूस कर सकते हैं। 
  • मास्टरबेशन अब बहुत किशोरों के लिए आम आदत हो सकती है।
  • लड़के अपने लिंग (पेनिस) के आकार को लेकर चिंतित हो सकते हैं। 
  • लड़कियां अपने ब्रेस्ट साइज को लेकर चिंतित हो सकती हैं।
  • कुछ को यह लग सकता है कि गर्लफ्रेंड या बॉयफ्रेंड होने से उनकी साख बनेगी।
  • नई चीज़ें आज़माने के लिए दोस्तों को दबाव बन सकता है।
  • कंडोम और गर्भ निरोधक गोलियों के बारे में जानकारी हो सकती है। 
  • सेक्स या शरीर के अंगों पर चुटकुले बनाते है।
  • खुद को पॉपुलर सामाजिक ढंग में फिट करने की कोशिश करते हैं।
  • 16 से 18 के बीच के किशोर सेक्स कर सकते हैं।
  • वे पोर्न देख सकते हैं।
  • वे इस बात का आभास करा सकते हैं कि उनके साथी को कैसा दिखना चाहिए और कैसा होना चाहिए।

ये किशोरावस्था में हमारे किशोरों के साथ हो रहे बदलावों में से कुछेक ही हैं। मगर एक बार आप ये समझ लें कि आपके बच्चे किस दौर से गुजर रहे हैं, आप उनका मार्गदर्शन कर सकते हैं या उनकी मदद कर सकते हैं। लेकिन वे तभी आपकी मदद को स्वीकार करेंगे जब वे देखें की आप उन्हें समझते हैं और उन्हें हर हाल में स्वीकार करेंगे।

आपके टीनएजर अभी एक स्वतंत्र व्यस्क बनने की प्रक्रिया में हैं जो अपनी मान्यताओं और मूल्यों में विश्वास रखते हैं। जितना ज़्यादा आप उन्हें समझते हैं और उन्हें चीजों की अपनी समझ रखने की अनुमति देते हैं, उतना ही वे आप पर सही दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए भरोसा करेंगे। वरना ज़्यादातर बच्चें सोचते हैं कि उनके माँ-पापा पुरानी सोच रखते हैं और आपको अपने इस सफर का हिस्सा नहीं बनाएंगे।

आपकी भूमिका 

कुछ सुझाव जो आपके अपने बच्चे का मार्गदर्शन करने में आपकी मदद करेंगे:

  1. समझें कि आपके किशोर किस चीज़ से गुज़र रहे है।
  2. उनकी भावनाओं, उनके विश्वासों और रुचियों को पहचानें।
  3. एकतरफा निर्देशों के बजाय उनसे बातचीत करें।
  4. उनके साथ वयस्कों जैसा व्यवहार करें; वयस्क परिपक्वता की अपेक्षा न करें।
  5. अगर आपका बच्चा आपसे तुरंत सहमत नहीं है तो धैर्य रखें।
  6. असल ज़िंदगी की कहानियाँ और परिस्थितियाँ देकर उन्हें नई चीज़ें सिखाएँ।
  7. उनके साथ अपने विचार, विश्वास और मूल्य शेयर करें।
  8. अपनी चिंताओं को उनके साथ शेयर करें।
  9. अपने टीनएजर के साथ अच्छे संसाधन शेयर करें और उन्हें अच्छी जानकारी तक पहुँचने में मदद करें।
  10. खुद भी टीनएजर्स के बारे में जानने के लिए अच्छे संसाधनों का इस्तेमाल करें।

जैसे बच्चे चलना या माँ और पापा को पहचानना सीखते हैं, वैसे टीनएजर्स भी अपने शरीर को पहचानने और अनुभव करने की ओर कदम बढ़ाते हैं। आप उनके मानसिक,भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में ज़रूरी भूमिका निभा सकते हैं और सेक्स और उससे संबंधित शिक्षा इसका एक अभिन्न अंग है।

और याद रखें यौन शिक्षा बच्चों को सेक्स के बारे में नहीं सिखाती। यह उन्हें अपने शरीर और उससे जुड़ी भावनाओं (जिसमे यौन भावनाये भी शामिल हैं) को ठीक से समझना और अपनी इच्छाओं को ठीक से संचालित करना सिखाती है।

यौन शिक्षा के बिना वे वयस्कता में कदम तो रखेंगे लेकिन उचित शिक्षा और महत्वपूर्ण जानकारी के बिना। क्या आप उनके करियर को लेकर ऐसा करेंगे? नहीं न? तो ये खतरा किसी ऐसी चीज़ (यौन सम्बन्ध और रिश्तें) के साथ क्यों जो आगे चलकर उनकी आगे की ज़िंदगी का एक अहम हिस्सा बनेगी? मैं इस सवाल के साथ आपकी विदा लेती हूँ। 

नियति शाह मुंबई में स्थित एक कामुकता शिक्षक, अंतरंगता कोच, लेखक, टेडएक्स स्पीकर हैं। ट्विटर से उनसे यहाँ जुड़ें।

क्या आपके मन में कोई प्रश्न है? हमारे विशेषज्ञों से पूछें! इस कॉलम में हम टीनएजर्स और उनके माँ-पापा से बड़े होने, टीनएज, यौवन पर प्रश्न लेते हैं; और उन्हें विषय वस्तु विशेषज्ञों के सामने रखते हैं 

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