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कैंटीन में सुना

गर्मियों में पूरी बाजू क्यों?

आरुषि (16) ब्रेक के समय अपनी दोस्त नमिता (16) और दृष्टि (16) के साथ बैठी थी। वो लगातार अपनी आस्तीन नीचे खींच रही थी और बेचैन हो रही थी। उसके दोस्तों ने उसके व्यवहार पर ध्यान दिया। आरुषि के बारे में चिंतित, उसके दोस्त उससे पूछते हैं कि क्या चल रहा था। आइए सुनते हैं उनकी कैंटीन टॉक।

गर्मियों में स्वेटशर्ट?

ब्रेक का समय था और तीन दोस्त क्लास में बैठ कर, खाने और बातें करने में व्यस्त थे। द्रष्टि ने पूछा, “क्या तुम दोनों ने आलिया भट्ट की नई मूवी देखी?”

नमिता ने जवाब दिया, “हाँ मैंने देखी। वो उसमे कितनी सुन्दर लग रही है! मुझे उसके कपड़े बहुत अच्छे लगे।”

नमिता ने आरुषि से पूछा, “क्या तुम्हें फिल्म देखने का मौका मिला?”

आरुषि बातचीत पर ध्यान नहीं दे रही थी, वह खोई हुई लग रही थी। वह बेचैन थी और लगातार अपनी आस्तीन नीचे खींच रही थी। अचानक द्रष्टि ने उसके हाथों पर ध्यान दिया। वहाँ कलाई पर कट के निशान थे। द्रष्टि ने पूछा, “आरुषि, क्या तुमने अपने हाथों पर फिर से कट बनाना शुरू कर दिया है?”

“क्या? … नहीं तो।”

“प्लीज़ मुझे अपना हाथ दिखाओ आरुषि।”

“दृष्टि, ऐसा कुछ नहीं है!”

“आज इतनी गर्मी है, तो तुमने स्वेटशर्ट क्यों पहनी हुई है?”

नमिता ने बीच में कहा, “आरू, ओएमजी! क्या तुम अपनी लाइफ ख़त्म करना चाहती थी? ब्रो सब ठीक तो है ना?”

मैं सच में अजीब हूँ

आरुषि रोने लगी, उसने अपनी बाँहें ऊपर उठायीं और अपने कट्स दिखाए।

“मुझसे नहीं हुआ। मुझे लगा मैं अपने आप को रोक लूँगी पर मैंने ये फिर से कर दिया।”

नमिता चौंक गई, “क्यों भाई, तुम ऐसा क्यों कर रही हो? मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा। और द्रष्टि, क्या तुम्हें इसके बारे में पता था?”

द्रष्टि ने सिर हिलाया।

आरुषि ने आगे कहा, “मुझे नहीं पता। मुझे लगा कि यह सिर्फ एक बार की बात है। सच कहूँ तो मुझे लगता है मैं अजीब हूँ। कभी कभी मैं अपने बाल खींचने लगती हूँ। कुछ दिन पहले मैंने अपना हाथ जला दिया। मुझे ऐसा लगता है कि मैं इसी के लायक हूँ, मेरे साथ ऐसा ही होना चाहिए।”

द्रष्टि रो पड़ी, “अरे नहीं आरुषि, मुझे लगा वो बस एक बार की बात थी वो भी उस लड़के की वजह से?”

आरुषि, “ओह, वियान, वो तो पुरानी बात है। उसने मुझे तनाया के लिए छोड़ दिया!”

नमिता ने फिर पूछा, “हाँ वियान एक बहुत ही खराब लड़का है। पर गलती उसने की थी तुमने नहीं। तो तुम खुद को सजा क्यों दे रही हो?”

आरुषि पहले तो झिझक रही थी, लेकिन फिर उसने जवाब दिया, “वियान के जाने के बाद, मैंने तनाया की तरह पतला दिखने के लिए खुद को भूखा रखा। लेकिन कभी कभी मैं खुद को खाने से रोक ही नहीं पाती थी तो उसके बाद मैं खुद को लंबी दौड़ पर जा कर बहुत थका देती थी। यार, मुझे खुद से नफरत है।”

गुस्सा और निराशा

“क्या! मुझे लगा ऐसा सिर्फ फिल्मों में होता है। मुझे समझ नहीं आ रहा है मेरी इतनी अच्छी दोस्त ये बेवक़ूफ़ी कैसे कर सकती है! सॉरी ब्रो, पर अब ये सब ख़तम करो। मुझे तुम पर बहुत गुस्सा आ रहा है,” नमिता ने कहा।

“तुम नहीं समझोगी नमिता! तुम्हारा बॉयफ्रेंड है। लेकिन मेरे पास कोई नहीं है। पहले अमीश ने मुझे रिजेक्ट कर दिया, फिर मुझे प्ले में जूलिएट के रोल से निकाल दिया गया, मैं अपनी पियानो की परीक्षा में भी फेल हो गई पर फिर मेरी ज़िन्दगी में वियान आया और मुझे लगा सब कुछ ठीक हो जाएगा। लेकिन उसने भी मुझे धोखा दिया! मुझे इतना गुस्सा और हताशा कभी महसूस नहीं किया। हर बार जब मैंने अपने आपको हर्ट करा, तो मुझे ऐसे लगता था कि मेरा भावनात्मक दर्द कम हो रहा है पर फिर वो सब वापस आ जाता है।”

नमिता ने संबंधित रूप से कहा, “अमीश और वियान बेवकूफ थे,आरुषि। उन्हें भूल जाओ। और वो प्ले तो वैसे भी बहुत बोरिंग होने वाला था, अच्छा हुआ तुम उसमे नहीं थी। पर इस सब के लिए तुम खुद को सजा मत दो। ये गलत है।”

द्रष्टि ने कहा, “हाँ, आरु। अगर तुम नहीं रुकी तो मैं आंटी को बता दूँगी। या तुम्हारे पापा को। क्या उन्हें इसके बारे में पता है?”

“मुझे तुम्हे बताना ही नहीं चाहिए था। तुम भी बाकी सब की तरह ही हो। मुझे धमकी दे रहे हो!” आरुषि चिल्लाई और सब उनकी टेबल की ओर देखने लगे।

“तुम दोनों शांत हो जाओ। हर कोई देख रहा है। द्रष्टि, यह गलत है। उसने हम पर भरोसा किया। हम उसे इस तरह माता-पिता की धामकी नहीं दे सकते। हमें उसकी मदद करनी है!” नमिता बोली।

द्रष्टि ने फिर सॉरी कहा और वे कुछ देर चुपचाप बैठे रहे।

आगे क्या?

“ब्रो, मैं तुम्हे इस तरह नहीं देख सकती। मैंने सिर्फ इसलिए आंटी को बताने वाली बात कही। अगर वह नहीं, तो शायद हम स्कूल काउंसलर के पास जा सकते हैं?” द्रष्टि ने सुझाव दिया।

“राधा मैम? बिल्कुल नहीं! अगर उन्होंने मेरे माँ-पापा या क्लास के बच्चों को बता दिया तो?” आरुषि चिंतित थी।

“वह मुझे अच्छी लगती है। सोनिया को थप्पड़ मारने के बाद मैं उनके पास गई थी! हाहा, लेकिन मैं तब कक्षा 3 में थी। तुम सही कह रही हो, हम उन पर इतनी आसानी से भरोसा नहीं कर सकते,” नमिता ने भी कहा।  

“ठीक है तो मीशा मैम का क्या? हमारे भूगोल की टीचर। हम सब उन्हें पसंद करते हैं और वो बहुत अच्छी भी हैं। और उन्होंने हमसे कहा भी था कि हमे जब भी ज़रूरत हो, हम उनसे बात कर सकते हैं। और उन्होंने तुम्हे पिछले साल वाद-विवाद प्रतियोगिता हरने पर भी समझाया था, हैना?” द्रष्टि ने सुझाव दिया।

“दोस्तों मैं वादा करती हूँ मैं दोबारा ऐसा नहीं करुँगी। मुझे पता है कि मीशा मैम अच्छी हैं लेकिन मैं किसी टीचर से बात नहीं करना चाहती!” आरुषि ने कहा।

द्रष्टि ने निराशा में कहा, “देखो, अगर तुम उनसे बात नहीं करोगी तो मैं करुँगी।”

“मैं द्रष्टि से सहमत हूँ। तुम्हें किसी से बात करनी होगी अरु। अगर तुम मीशा मैम से सहज हो तो क्यों नहीं?” नमिता ने पूछा।

“पर मैं उन्हें क्या बताऊँ? कि मैं एक लड़के की वजह से रो रही हूँ? नहीं, मैं ये नहीं कर सकती, बिलकुल नहीं!” अरुशी ने कहा।

” तुम उनसे पियानो और प्ले का उदाहरण दे कर अपनी असफलता की भावनाओं के बारे में बात कर सकती हो। आखिर असली दिक्कत तो वो ही है ना?” नमिता ने पूछा।

नमिता की बात पर आरुषि ने अपना नाखून चबा लिया। “असफलता का सामना करने के बाद हम सभी को बुरा लगता है। लेकिन तुम्हे उनसे आगे बढ़ने में परेशानी हूँ रही है। तो तुम्हे उस पर ध्यान देना चाहिए।”, उसने समझाया।

“धन्यवाद नमिता। तुम्हारी ये बात सुन कर मुझे पहले से बहुत बेहतर महसूस हो रहा है। मैं मैम से बात करने के बारे में सोचूँगी, पक्का। पर मुझे थोड़ा सा समय दो।”, आरुषि ने विनती की।

दृष्टि और नमिता ने चिंतित होकर एक दूसरे को देखा। लेकिन फिर सिर हिलाया और अरुशी को कुछ समय देने के लिए तैयार हो गए। द्रष्टि ने पहले कहा, “ठीक है, लेकिन कुछ शर्तों पर। तुम खुद को और चोट नहीं पहुँचाओगी , अगर तुम कभी भी फिरसे ऐसा महसूस करती हो, तो हम दोनों में किसी को कॉल करोगी, चाहे दिन हो या रात। और हाँ इस हफ्ते के अंदर मीशा मैम से बात करोगी।ठीक है?”

द्रष्टि के बेहद नाटकीय अंदाज़ पर आरुषि मुस्कुराई। “ठीक है, प्रॉमिस“। घंटी बजी जब तीनों दोस्तों ने एक दुसरे को गले लगाया और अपनी कक्षा में वापस जाने के लिए उठे।

तस्वीरें: Shutterstock/rawpixel.com/फोटो में व्यक्ति मॉडल हैं, नाम बदल दिए गए हैं।

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