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फीलिंग्स एक्सप्रेस

‘मुझे लगा की शायद मैं कूल नहीं हूँ… ‘

बहुत सोचने के बाद निशा आखिरकार स्कूल की फेयरवेल की पार्टी में चली ही गयी। और वहाँ वही हुआ जिसका उसे डर था, किसी ने उसे बीयर पीने के लिए पूछा। और ये ड्रिंक ऑफर करने वाला कोई ग़ैर नहीं था। अब वो क्या करेगी? जानने के लिए आगे पढ़िए।

आखिरी पार्टी

यह रविवार की शाम थी, पार्टी बाहर एक फार्महाउस में होने वाली थी। लगभग सभी लोग आ रहे थे। निशा अपने दोस्तों द्वारा मनाए जाने के पुरे एक दिन बाद वहाँ जाने के लिए मानी थी। और वो उस पार्टी के लिए बहुत उत्साहित भी थी, क्योंकि ये शायद उसके पास अपने सभी दोस्तों से साथ में मिलने का आखिरी मौका था। अगर उसे चिंता थी तो सिर्फ एक बात की, वो था अल्कोहल।

निशा शुरू से बहुत पढ़ाकू थी और कभी किसी पार्टी में नहीं गयी थी, ऊपर से उसे अल्कोहल पीने का बिल्कुल भी शौक नहीं था। पर ये उसकी स्कूल लाइफ की आखिरी पार्टी थी तो उसके दोस्तों ने उसे मनाने की ठान ली थी– थोड़ा भावुक करके और उसके क्रश के वहाँ होने का बहुत सारा लालच देकर।

जाने का समय होने ही वाला था तो वो तैयार होकर अपनी दोस्त का इंतज़ार करने लगी। वो दोनों पार्टी में साथ ही घुसे लेकिन जल्द ही अलग होकर डांस फ्लोर पर आ चुके थे। कुछ एक घंटे बाद वो वापस मिले और उसकी दोस्त उसे स्नैक की टेबल पर ले गयी। उसे ये एहसास अभी नहीं हुआ था, पर वो उस समय अपने क्रश के साथ ही खड़ी थी।

बौखला जाना!

जब उसे इस बात का एहसास हुआ था वो अचानक बहुत बेचैन हो गयी और इधर उधर देखने लगी। उसने साथ के लिए अपनी दोस्त की तरफ देखा, जिसने उसे शांत होने का संकेत दिया, इसलिए उसने एक गहरी सांस ली और और खुद को शांत किया। जैसे ही उसने अपना ध्यान बटांया, आरुष ने खुद उसे बीयर के लिए पूछा। और अब वो पूरी तरह से कंट्रोल खो चुकी थी।

उसके दिमाग में सब कुछ स्लो मोशन में चल रहा था। आरुष उसके सामने खड़ा था और अपनी क्यूट सी मुस्कान के साथ उसकी तरफ देखकर उसे बीयर के लिए पूछ रहा था। उसकी दोस्त भी उसके जवाब का इंतज़ार कर रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे उसका दिल अभी कूद कर उसके सामने खड़ा हो जाएगा। अगर उसे मै बोरिंग लगी तो? उसे मै पसंद नहीं आयी तो? या उससे भी बुरा, उसने मेरा मज़ाक उड़ाया तो?

शांत और दुर्लभ

ये सब सवाल उसके दिमाग में बहुत तेज़ी से घूम रहे थे, जब उसने बिना सोचे पूरे कॉन्फिडेंस के साथ मुस्कुराते हुए जवाब दिया,”नहीं थैंक्स, मै बियर नहीं पीती” और अब वो अपना मज़ाक बनने का या उन सब के उसको छोड़ कर जाने का इंतज़ार करने लगी।

पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। बल्कि आरुष ने बीयर की बोतल वापस खींची और मुस्कुरा कर कहा,”ओह, अच्छा आज कल ऐसा बहुत कम होता है, सुनकर अच्छा लगा।” निशा का मुँह खुला का खुला रह गया और बाकी लोग अभी भी अपनी बातों में लगे हुए थे।

ये सब देख कर निशा बहुत बेहतर महसूस करने लगी। लोग उसके बारे में क्या सोचते हैं, इस बात की अब उसे कोई चिंता नहीं थी। उसे अब समझ आ चुका था कि अल्कोहल पीने और कूल होने का आपस में कोई लेना-देना नहीं था।

और वो इस बात से और भी खुश थी कि उसके दोस्त इन सब बातों  थे। और इसी सोच के साथ वो मुस्कुराते हुए फिर से आरुष से बात करने लगी। वो खुश थी की वो पार्टी में आयी और अपनी बात भी रख पायी। 

शांत और दुर्लभ

क्या आप कभी निशा की स्थिति में आए हैं? आपने कैसा महसूस किया? क्या आपने इसके बारे में कुछ किया? नीचे कमेंट बॉक्स में हमारे साथ शेयर करें। याद रखें, कोई भी व्यक्तिगत जानकारी कमेंट बॉक्स में न डालें।

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