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फीलिंग्स एक्सप्रेस

मोटी हूं मगर खुद की फेवरेट हूं

16 साल की सना अपने बढ़े हुए वजन के कारण परेशान है। उसे कई लोग चिढ़ाते भी हैं लेकिन उसे इन सब बेकार की बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। क्यों? क्योंकि उसने अपनी सुपर पॉवर को ढूंढ लिया है। सना की सुपर पावर के बारे में और जानने के लिए इस हफ्ते का फीलिंग्स एक्सप्रेस पढ़िए!

 

 

ज्यादा जगह घेर ली क्या 

ये कहानी तब शुरू हुई, जब मैं केवल पांच साल की थी। उस वक्त मेरे शरीर के कारण मेरे दोस्त ने मुझे बाइक पर बिठाने से मना कर दिया था क्योंकि उसे लगा था कि अगर मैं उसकी बाइक पर बैठी तो उसकी बाइक टूट जाएगी। मुझे ये बहुत बुरा लगा था। और वो बात मुझे अभी भी अच्छे से याद है।

आज भी जब मैं बस या ट्रेन में जाती हूं, तो लोग मुझे घूरते हैं। उन्हें लगता है कि मैं बहुत ज्यादा जगह ले रही हूं, और केवल सीट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में ही। ये चीजें मेरे साथ रोज होती हैं। 

ऐसे में अगर मुझे कोई पसंद है, तो मैं अपनी फीलिंग उसके साथ शेयर भी नहीं कर सकती क्योंकि मुझे पता है कि वो मेरा मजाक ही बनाएगा। साथ ही मुझे शॉपिंग करना भी अच्छा नहीं लगता है क्योंकि मुझे मेरे साइज के कपड़े ही नहीं मिलते।

प्ले ग्राउंड, जहां लोग मस्ती करने के लिए जाते हैं, कभी-कभी वो जगह मुझे बहुत अकेला महसूस कराती है क्योंकि मैं जब भी वहां एक्सरसाइज करती हूं, जैसे- दौड़ती हूं या टहलती हूं, तो लोग मेरा मजाक बनाते हैं। 

जब कभी मुझे लगता है कि ये सब अब ज्यादा हो रहा है, तो मैं अपनी मां से बात कर लेती हूं। अपने बचपन में वो भी एक हेल्दी बच्ची थी इसलिए वो मेरी बातों और मेरे संघर्ष को समझती हैं। वो मुझे हमेशा कहती हैं कि मैं इन सब बेकार की बातों को नजरअंदाज करुं। लेकिन हमेशा इन सब बातों को नजर अंदाज कर देना आसान नहीं होता है।

किसकी गलती है?

मैं एक बात बिल्कुल क्लीयर कर देना चाहती हूं कि ये कोई ब्लेम गेम नहीं है। मैं अपने मम्मी-पापा  को दोष नहीं दे रही हूं और ना ही खुद को। साथ ही मुझे मीठी चीजों से या जंक फूड से भी कोई खास लगाव नहीं है। और मेरे मम्मी-पापा? वो मेरा बहुत साथ देते हैं, वो हमेशा किसी भी मुश्किल और परेशानी में मेरे साथ खड़े होते हैं। ये केवल मेरी लड़ाई नहीं है, बल्कि उनकी भी है।

उन्हें भी कई बार मेरे कारण सुनने के लिए मिला है कि इसको ‘जिम ज्वाइन करवा दो’ या इसके लिए ‘सलाद वाली  डाइट’ बढ़िया रहेगी।   

लेकिन सोचो क्या मैंने वजन घटाने की कोशिश नहीं की होगी? मैंने भी कोशिश की है और अभी भी कर रही हूँ पर उससे भी ज़रूरी ये है कि मै अपने और अपने साथ और अपने शरीर से खुश रहूँ। मैं किसी दूसरे पर भरोसा नहीं करती कि वो मुझे अच्छा महसूस कराएं। मेरे मम्मी-पापा हमेशा मेरे अंदर कॉन्फिडेंस बढ़ाने की कोशिश करते हैं।

हां, मेरी लाइफ में ऐसे कई पल आएं हैं, जब मुझे अजीब और गंदे कमेंट्स का सामना करना पड़ा है। लोग मुझे फैटो, गोलू, मोटू, भैंस आदि नाम से भी बुलाते हैं। लेकिन मैंने सीखा है कि मैं इन सब बातों पर ध्यान नहीं दूंगी। समाज मेरे बारे में चाहे कुछ भी सोचे, मैं हमेशा खुद से प्यार करुंगी, बस मैं इसी तरह ही जीना चाहती हूँ – अपनी फेवरेट बन कर।   

इसे अपना सुपर पॉवर बनाओ 

आज मुझे पुरानी बीती बातें याद आ रही है कि कैसे चीजें समय के साथ बदलती चली गई। मैं कभी एक ओवर वेट बच्ची हुआ करती थी, और वो यादें, आज भी मेरा ही हिस्सा हैं लेकिन ये पुराने पल मेरी पहचान नहीं हैं।

समय के साथ मैंने सीख लिया है कि खुद की बॉडी को, अपनी त्वचा को अपने अनुसार आरामदायक स्थिति में रखना जरूरी है। खासकर तब, जब आप एक टीनएजर हो क्योंकि इस वक्त हर किसी के पास आपके लिए कोई ना कोई सुझाव होता ही है। ये बिल्कुल एक ऐसे कोर्टरूम के जैसा है, जहां आपने कभी ट्रायल के लिए बोला ही नहीं।  

लेकिन तुम्हें पता है कि मैंने क्या सीखा है? अपने आप के साथ कंफर्ट महसूस करना। और यही मेरी सुपर पॉवर भी है। ऐसा महसूस होता है कि हर कोई इस बात का एक्सपर्ट है कि हमें कैसा दिखना चाहिए। ऐसा लगता है कि खुद से खुश रहना एक विद्रोह की तरह है।

मुझे पता चल गया है कि खुद से प्यार करने के लिए मुझे उन लोगों की ज़रूरत नहीं है, जिन्हें किसी के दर्द का अंदाजा नहीं होता। एक टीनएजर होने के नाते मैंने सीखा है कि यहां रहना कठिन है क्योंकि यहां लोगों ने सुंदरता का अलग-अलग पैमाना तय किया हुआ है लेकिन मैंने कोशिश की है कि मैं अपने तरीके से उनके खिलाफ आवाज उठाउंगी। मैं किसी के बनाए नियमों के साथ नहीं खेल रही क्योंकि मैं खुद से प्यार करती हूं, जिसे सेल्फ लव कहा जाता है। मैं अपने लिए सुंदरता के पैमाने खुद तय करती हूं।

मैं उन सभी टीनएजर से कहना चाहती हूं, जो मेरी ही तरह की परेशानी का सामना कर रहे हैं कि हमेशा अपनी धुन्न में चलो। जानते हो, तुम्हें अपने आप से प्यार करने के लिए किसी के परमिशन की जरुरत नहीं है। तुम अपने आप का महत्व खुद समझो, उसे संवारो और याद रखो कि खुद से प्यार करना सबसे ज्यादा जरूरी है। 

क्या आप कभी निशा की स्थिति में आए हैंआपने कैसा महसूस कियाक्या आपने इसके बारे में कुछ कियानीचे कमेंट बॉक्स में हमारे साथ शेयर करें। याद रखेंकोई भी व्यक्तिगत जानकारी कमेंट बॉक्स में  डालें।

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