देश का फ़्यूचर हुआ घर में बंद!

By: Yash Tiwari

‘इतने लंबे समय तक घर की चार दीवारों में रहना आसान नहीं रहा है। दोस्त नहीं, स्कूल बंद, खेल बंद - इन सब का हमारी एनर्जी पर बहुत असर पड़ा है’, यश तिवारी ने अपनी डायरी का एक पेज शेयर किया टीनबुक के साथ।

देश का फ़्यूचर हुआ घर में बंद!

सब कुछ बंद

हम टीनएजर्स खुद को भविष्य का ड्राइवर मानते हैं। हमे लगातार चलते और बढ़ते रहना पसंद है - एक सफलता से दूसरी सफलता की ओर।

तो सोचिये हमे इतने समय से चार दीवारी में बंद रहना कैसा लग रहा होगा।

जब मार्च में लॉकडाउन घोषित किया गया, तो ये सच में एक वेकेशन की तरह आया। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग का कोई तनाव नहीं।

लेकिन फिर धीरे धीरे हमे समझ आया कि असल में हो क्या रहा है।

कोरोना के मामले बढ़ते रहे और उसी के साथ लॉकडाउन भी। ये उन स्कूल के दिनों की तरह नहीं था जब हम एक सख्त टाइम टेबल से चलते थे, अब हमारी क्लास ऑनलाइन होती हैं और हाथ में बचता था बहुत सारा खाली समय।

ख़ुशी की छुट्टी नहीं

शुरू में ये थोड़ा मुश्किल था, पर इस लॉकडाउन ने मुझे अपने बारे में सोचने का काफी समय दिया।

मुझे एहसास हुआ कि अपने घर में बंद रहने का मतलब सिर्फ ये है कि हम शारीरिक और सोशल रूप से लोगों से दूर हैं। इसका मतलब ये नहीं कि हमे ख़ुशी देने वाली सभी चीज़ें की भी छुट्टी हो गयी हैं।

मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास अब उन किताबों को पढ़ने का समय है जिन्हे मैं बहुत समय से टाल रहा था। किसी और के लिए ये ऑनलाइन गिटार सीखने का वो मौका था जिसके लिए उनके पास पहले कभी समय नहीं था!

कलम के साथ

मैंने अपने खाली समय का फायदा उठाते हुए एक किताब लिखने की सोची, वो भी कोरोना वायरस के बारे में। यही सोच कर कि चलो मेरे दिन तो कुछ अलग करने में गुज़रेंगे! 

मेरी किताब  “महामारी 2020 - वायरस की लहर" इस महामारी और पूरी दुनिया पर इसके असर के बारे में है। ये कहानी पूरी दुनिया को आपस में जोड़ती है जैसे भारत, चीन, इटली और अमेरिका के वो हिस्से जिन पर इस महामारी का सबसे ज़्यादा असर हुआ था।

किताब लिखने से मैंने बहुत कुछ सीखा। मैंने महसूस किया कि मुश्किल समय के दौरान सबसे ज़रूरी बात है मानसिक रूप से शांत रहना और उन एक्टिविटीज़ से अपने उत्साह और एनर्जी को बनाए रखना जिनसे आगे चलकर हमे मदद मिलेगी।

और इसकी ज़रूरत पहले से कई ज़्यादा अब है क्योंकि अब हमारे पास समय है जो शायद पहले के हमारे व्यस्त दिनो में हमारे पास नहीं था!

18 वर्षीय यश तिवारी, उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के निवासी हैं। वो एक युवा लेखक हैं जो दो किताबें लिख चुके हैं। उनकी सबसे नई किताब कोरोना वायरस के बारे में थी। उन्होंने कई सारी  टेड-एक्स टॉक्स की हैं और जोश टॉक्स पर मोटिवेशनल स्पीच भी दी है।

कलम के साथ

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