सिर्फ लड़के ही मज़े क्यों करे?

By: Himani Bakhda

अनन्या (15), अपने दोस्तों न्यासा और दीप्ति के साथ स्कूल की कैंटीन में बैठी थी। वो काफी उदास लग रही थी तो उसके दोस्तों ने उससे पूछा कि उसे क्या परेशानी है। बस फिर क्या था! उसने कुछ ऐसा शेयर किया जो शायद क्लास की हर लड़की के साथ हुआ होगा। उसकी प्रॉब्लम आखिर क्या थी?

सिर्फ लड़के ही मज़े क्यों करे?

सिर्फ लड़के ही मज़े क्यों करे?

यह बिलकुल ठीक नहीं है! 

"अनन्या, तुमने अपना टिफिन अब तक छुआ भी नहीं है। सब ठीक है?" न्यासा ने पूछा।

“न्यासा, मेरा मूड बहुत खराब है। मैं इतनी परेशान हूँ कि समझ नहीं आ रहा शुरुआत कहाँ से करूँ? इस शनिवार मैंने माँ से नेहा के घर रहने जाने के लिए पूछा, पर उन्होंने मुझे साफ़ मना कर दिया! " अनन्या ने शिकायत की।

"पर मेरा भाई जब चाहे अपने दोस्त के घर गेम खेलने जा सकता है। उसकी बात हमेशा मानी जाती है। ये बहुत गलत बात है!" उसने कहा।

“क्या तुमने अपनी माँ से पूछा कि उन्होंने तुम्हें मना क्यों करा?" न्यासा ने पूछा।

"हाँ, हमेशा की तरह, उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें मेरी सुरक्षा को लेकर चिंता रहती है", अनन्या ने जवाब दिया।

"मेरी मम्मी ने भी मुझे यही कारण दिया", दीप्ति ने कहा, जो उनके बगल में बैठी थी और उनकी बातचीत को सुन रही थी।

"मुझे पता है, मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है", अनन्या ने कहा।

घर पर बैठो?

"हमे उनके नज़रिये से भी समझना चाहिए क्योंकि आजकल वाकई बहुत किस्से हो रहे है। उस ही दिन हमारी कॉलोनी से एक कुत्ता लापता हो गया और एक दिन तो किसी ने मेरी साइकिल ही चुरा ली!”, न्यासा ने समझाने की कोशिश की।

"तो हम क्या करें? घर से बाहर ही ना निकले?" निराश अनन्या ने पूछा।

“अपनी माँ से बात करने की कोशिश करो। उनको नेहा से मिलवाओ जिससे वो उसे और उसके परिवार को जान पाए। इस तरह वो भी तुम्हे उसके घर भेजने में ज़्यादा चिंता महसूस नहीं करेंगी। तुम उन्हें नेहा या उसकी माँ का फ़ोन नंबर दे सकती हो जिससे वो तुमसे जब चाहे बात कर सके”, न्यासा ने सुझाव दिया।

"ये आईडिया अच्छा है। अनन्या तुम्हें ये आज़माना चाहिए", दीप्ति ने अपना सैंडविच खाते हुए कहा।

“हाँ दीप्ति, जब मुझे शीतल के घर रहने जाना था, मेरी मम्मी भी मुझे छोड़ते समय थोड़ी देर शीतल की मम्मी के यहाँ रुक गयी थी और अब वो दोनों भी बहुत अच्छे दोस्त हैं”, न्यासा मुस्कुराई।

लेकिन मुद्दा ये नहीं है!

“दीप्ति, मैं तुम्हारी ये तरकीब का इस्तेमाल करुँगी। देखते हैं ये मेरे घर पर काम करता है या नहीं। पर मुद्दा ये नहीं है, क्या तुम सबको नहीं लगता कि हम लड़किओं को हमारे भाइयों या लड़के दोस्तों से अलग माना जाता है?” अनन्या ने पूछा।

दोनों ने हाँ में सर हिलाया।

"क्या हमारे माता-पिता हमसे उतना प्यार नहीं करते जितना हमारे भाई से करते हैं?" अनन्या ने कहा, जैसे शायद खुद से ही पूछ रही हो।

"मैं तुम्हें समझती हूँ अनन्या, पर ऐसे मत सोचो। वो हमसे भी बहुत प्यार करते हैं”, दीप्ति ने कहा।

“तुम्हें पता है उस दिन मैंने इंस्टाग्राम पर एक फोटो डाली तो माँ ने मुझे उसे फ़ौरन हटाने के लिए कह दिया, ये कहकर की वो मेरे लिए सेफ नहीं है। पर जब मेरा भाई ऐसा करता है यो वो उसे कुछ नहीं कहती ये बोलकर कि वो बच्चा है!” अनन्या ने फिर शिकायत की।

“हाँ, क्या तुम्हें पता है ये इंटरनेट ट्रोल कितने खराब होते हैं। सच में, वो मेरे पेज पर इतने बुरे कमेंट करते थे कि मैंने तो इनकी वजह से अपना अकाउंट ही बंद कर दिया। तुम्हारी मम्मी भी इसलिए तुम्हारी चिंता करती होंगी। और मुझे पक्का पता है कि जब तुम्हारा भाई इस उम्र का होगा, तो उसे भी यही सुनने को मिलेगा”, न्यासा ने जवाब दिया।

“और सिर्फ ये ही नहीं, उस दिन मेरी चाची के साथ मुझे सफाई में मदद करने को कहा गया पर मेरा भाई सोफे पर सिर्फ चिल कर रहा था”, अनन्या की शिकायतें अभी तक खत्म नहीं हुई थीं!

अभी और है

"यह सही नहीं है अनन्या। तुम्हें इस बारे में अपनी मम्मा से बात करनी चाहिए थी”, न्यासा ने कहा।

"मैंने कोशिश की, लेकिन माँ ने मुझे चुप करा दिया और कहा की अभी वो छोटा है। और वैसे भी हम लड़कियों से सभी उम्मीद करते हैं कि हम इस ढंग से बैठे, खाएं, चले, अच्छे से काम करें और लड़कों के मुकाबले में बाहर भी कम जाए", अनन्या ने एक बार फिर कहा। 

उनकी क्लास टीचर मधु, जो वहाँ थीं, उनकी बातें सुन रही थीं।

“अनन्या, तुम सही हो। ये बातें होती हैं। ये सच है कि अभी भी कई घरों में लड़को और लड़कियों के साथ अलग व्यव्हार किया जाता है। आप देखेंगे की आपके मम्मी-पापा आपके साथ वैसा ही व्यव्हार करते हैं जैसे उनके माता-पिता उनके साथ करते थे। हो सकता है कि आपकी माँ को घर के सभी काम करने के लिए कहा गया हो, या अकेले बाहर न जाने दिया जाता हो”, मधु मैम ने समझाया।

"हाँ, हो सकता है", अनन्या ने धैर्य से सुना।

“हाँ अनन्या, और अगर आप सोचो तो माता-पिता को लड़कों से भी बहुत सी उम्मीदें होती हैं। वे चाहे वो जितना भी बुरा महसूस कर रहे हो, वो रो नहीं सकते। वो पिंक नहीं पहन सकते वरना उन्हें लड़की कह कर चिढ़ाया जाता है, उन्हें परिवार के लिए पैसे कमाने की ज़िम्मेदारी भी दी जाती है। और ये सब उम्मीदें इसलिए क्योंकि वो लड़के हैं”, मधु मैम ने समझाया।

"फिर भी हम लड़कियों को बहुत सहन करना पड़ता है। मुझे लगता है हमे ये सब मान लेना चाहिए क्योंकि हम इसे नहीं बदल सकते। हमे बस इसे अनदेखा कर देना चाहिए”, दीप्ति ने आह भरी।

"दीप्ति समस्या से भागने से वो ठीक नहीं हो जाएगी। आपको हमेशा अपनी मुसीबत का सामना करना पड़ता है क्योंकि जहाँ हम रहते है ज़रूरी नहीं वो हमेशा हमारे लिए सही हो। हमे इसे अनदेखा करने की जगह इसके खिलाफ आवाज़ उठानी होगी जिससे हम अपने लिए एक बेहतर माहौल बना सके”, मधु मैम ने लड़कियों के साथ बैठ कर उन्हें समझाया।

छोटे छोटे कदम!

"पर कैसे?" अनन्या ने पूछा।

“शुरुआत के लिए ये सोचो कि आप और आपके साथ के लड़के बिलकुल बराबर हैं और आप सब में कोई फर्क नहीं है। अपने आत्मसम्मान को बढ़ाएँ, और और कोई आपके साथ भेद-भाव करे तो उसे बिलकुल भी स्वीकार ना करें। जब तक आप खुद का महत्व नहीं समझते कोई और भी आपको महत्व नहीं देगा।”

"लेकिन क्या होगा अगर हम अभी भी घर में भेदभाव का सामना करते हैं?" अनन्या ने पुछा। 

“छोटे कदम अनन्या, छोटे कदम। धीमी शुरुआत करो। आप ये सब एक दिन में नहीं बदल सकते। इसलिए अपने परिवार और दोस्तों के साथ विनम्रता से शुरुआत करो। इस तरह जब कोई आपके लिंग के आधार पर भेद भाव करता है तो उसे लिंगवाद या सेक्सिस्म कहा जाता है। कई लड़कियां 11-13 साल की उम्र के आसपास इस तरह के मतभेदों को नोटिस करना शुरू कर देती हैं और इसके साथ सामना करने का सबसे अच्छा तरीका है इस बारे में खुलकर बात करना। समझदारी से बात करके आप अपने मम्मी-पापा अपना साथी बना सकते है”, मधु मैम ने कहा।

"लेकिन हमारे माता-पिता हमारी बात नहीं मानते हैं। अगर हम उन्हें कुछ समझाने की कोशिश करते हैं तो वो उससे बहस का नाम दे देते हैं! " न्यासा, जो अब तक चुप बैठी थी, ने कहा।

"वे एक दिन सुनेंगे, न्यासा । मेरे घरवाले भी मान ही गए न। आपको बस थोड़ा सब्र करना होगा और उनकी बात भी सुननी होगी। लंबे समय से चली आ रही चीजों को बदलने में समय लगता है। एक अच्छी बातचीत हमेशा दोनों तरफ़ से होती है, है ना? " मधु मैम ने कहा और वैसे ही घंटी बज गयी। सभी ने जल्दी से अपना लंच ख़त्म किया और उठ गए!

“थैंक यू मैम। यह एक बहुत अच्छा डिस्कशन था। हमें इस बारें में और बात करनी चाहिए। एक क्लब भी बना सकते हैं!” लड़कियों ने उत्साह से कहा और अपनी क्लास की ओर चल दी।

छोटे छोटे कदम!

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