जब कुबड़ी कुब्जा बनी कॉंफिडेंट कुब्जा!

By: Anu Shakti Singh

कुबड़ी कुब्जा की कहानी सुनी हैं आपने? जिन्हे कान्हा ने एक सुन्दर स्त्री में बदल दिया था। पढ़िए अब इस कहानी को टीनबुक तड़के के साथ!

जब कुबड़ी कुब्जा बनी कॉंफिडेंट कुब्जा

कुब्जा क्यों 

किसी ज़माने में मथुरा नाम के शहर में एक लड़की रहती थी। बहुत होशियार, समझदार और सबका ख़याल रखने वाली। उस लड़की को फूल चुनना, फ़ूलों से तरह तरह के पेस्ट/ उबटन बनाना बहुत पसंद था। दुनिया भर से लोग उसके पास आते और कहते, ‘ऐ कुब्जा हमें भी अपना फूलों और सैंडल वुड वाला पेस्ट दो न। तुम्हारे ये उबटन इतने अच्छे हैं कि लगाते ही फ़ील गुड हो जाता है।’ 

कुब्जा – यही नाम था उस लड़की का। ये नाम क्यों पड़ा?...उसकी पीठ पर एक कूबड़ था तो लोगों ने उसे कुब्जा का नाम दे दिया। जैसे कोई सांवली लड़की ‘काली’ हो जाती है, किसी की हाईट कम हो तो लड़का नाटा और लड़की नाटी हो जाती है, कोई लम्बा हो तो उसका नाम लम्बू और चश्मिश तो हर चश्मा पहनने वाला होता है। इसी तरह से उस फूल और खुशबूदार उबटन बेचने वाली लड़की का नाम भी कुब्जा पड़ गया था। 

बॉस, उस लड़की में एक ख़ास बात तो थी, दुनिया कुछ भी कहे वो किसी की सुनती नहीं थी। बस अपनी पसंद के फूल चुनती। अपने लोगों से मिलती और अपना काम करती रहती। 

मथुरा का डॉन

कुब्जा का एक रेग्युलर कस्टमर था। उसी के शहर मथुरा का एक लोकल डॉन, जिसका नाम था कंस। यूँ तो कंस थोड़ा सा गड़बड़ करैक्टर था लेकिन दोस्त वो उस लड़की जिसे लोग कुब्जा कहते थे, उसे बहुत मानता था। उसे रोज़ उस लड़की के बनाए हुए फ्रेगरेंस/ख़ुशबू वाले उबटन और तेल (एसेंशियल आयल) चाहिए होते थे। लड़की भी एकदम टाइम की पाबन्द। भले ही सूरज को निकलने में देर हो जाये, उस लड़की को कभी देर नहीं होती थी। हर रोज़ छः बजे  नहीं वो डॉन कंस के घर अपना तेल और उबटन लेकर पहुँच जाती

ऐसे ही एक सुबह रोज़ की तरह वो कंस के पास जा रही थी कि रास्ते में एक लड़का उसके सामने आ गया और कहने लगा, ‘ऐ लड़की, तुम्हारा नाम क्या है? तुम  मुझे ये चंदन और ऑइल दोगी क्या? इसकी खुशबू बहुत अच्छी है और मेरा बहुत मन कर रहा है कि इसका इस्तेमाल करूँ।’ 

लड़की ने कहा, ‘लड़के, तुम दूर हटो। मेरा सामान तुम्हारे लिए नहीं है। ये कंस के लिए लेकर जा रही हूँ मेरा नाम त्रिविका है पर लोग मुझे कुब्जा कहते हैं।’ 

सुनो त्रिविका! 

लड़के ने कहा, ‘सुनो त्रिविका, मेरा नाम कान्हा है और मैं तुम्हें इस सामान की कंस से ज़्यादा कीमत दूंगा। वैसे भी कंस तो बदमाश आदमी है, लोगों को तंग करता है।’ 

लड़की चौंक गयी, उसे पहली बार किसी ने अपने नाम से बुलाया था। उसने कहा  ‘कान्हा, तुम पहले इंसान हो जिसने मुझे मेरे नाम से बुलाया। ‘ 

कान्हा ने कहा, ‘त्रिविका, मैं भी तो सांवला हूँ, लेकिन तुमने कालू कह कर तो नहीं बुलाया। तुमने मुझे मेरे नाम से बुलाया। तो मैंने भी तुम्हे तुम्हारे नाम से बुलाया। वैसे एक बात कहूँ तुम बहुत ही मेहनती और काबिल लड़की हो। तुम जितने अच्छे फ़ेसपैक और एस्सेंशियल आयल बनाती हो, ख़ुद भी उतनी ही अच्छी हो। तुम्हारा नाम भी उतना ही अच्छा है।”

त्रिविका चौंक गयी। “क्या सच में मैं अच्छी हूँ?”

कान्हा ने कहा “हां त्रिविका, ज़रा अपने आप को मेरी नज़रों से देखो।” 

इस पर कुब्जा ने पूछा “पर मेरी पीठ पर जो ये कूबड़ है…”

सुन्दर काम     

कान्हा ने हंस कर जवाब दिया, ‘अरे उस पर तो मेरा ध्यान भी नहीं गया, मैं तो तुम्हारे बनाये चन्दन की खुशबु निहार रहा था। और सोच रहा था की तुम अपने काम के प्रति कितनी सच्ची हो। रोज़ सुबह छः बजते नहीं की तुम उससे पहले रेडी भी होती हो।और रही बात कूबड़ की... त्रिविका, यार इस दुनिया के स्टैण्डर्ड के अनुसार अपने आपको देखने लगोगी न तो परेशान हो जाओगी। ज़रूरी है कि हम अपने आप में ख़ुश रहें। यार, तुम्हारे जैसा कोई और नहीं है। तुम्हारी अच्छाई तुम्हारी मेहनत में हैं और सबको तुमसे से प्रेरणा लेनी चाहिए की अपने काम से अपनी पहचान कैसे बनाएं।”  

“जैसे दुनिया मुझे नटखट, शैतान, माखनचोर क्या-क्या कहती है पर  मुझे पता है मैं दिल का बहुत अच्छा हूँ। सबकी हेल्प भी तो करता हूँ। है न!’ 

त्रिविका ख़ुश हो गयी। उसने तो कभी ऐसे सोचा ही नहीं था। अचानक ही उसे लगा कि वो भी बहुत अच्छी है। यह सोचकर वो मुस्कुराने लगी। 

उसको मुस्कुराता देखकर कान्हा ने कहा, ‘अब बता दो, दोगी ये सारा सामान।’ 

त्रिविका ने कान्हा की बात सुनकर उसे  ख़ुद ही सारे एस्सेंशियल आयल और फ़ेसपैक दे दिए और उसे अपने घर खाने पर भी इन्वाइट किया। 

कान्हा और त्रिविका हमेशा दोस्त रहे और कुछ लोग कहते हैं, बाद में उन्होंने एक-दूसरे को डेट भी किया।।।  

असली कहानी - यह कहानी महाभारत के प्रसिद्ध चरित्र त्रिविका और कृष्ण से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि जब कृष्ण पहली बार मथुरा लौटे थे तो कंस के दरबार में जाते हुए उनकी मुलाक़ात त्रिविका नाम की एक औरत से हुई थी, जिससे पूरा शहर केवल इसलिए नफरत करता था कि वह देखने में बहुत सुन्दर नहीं थी और उसकी पीठ पर एक कूबड़ था। त्रिविका का रोज़ का काम कंस को उबटन और तेल लगाने का था।

यह भी कहा जाता है कि त्रिविका पूर्व जन्म में कोई अप्सरा थी जिसे किसी श्राप की वजह से ऐसा जीवन बिताना पड़ा था। जब रास्ते में कृष्ण की मुलाक़ात त्रिविका से हुई तो कृष्ण ने हंसी मज़ाक करते हुए त्रिविका का रूप बदल कर उसे वापस अप्सरा बना दिया। त्रिविका इस बात से इतनी ख़ुश हुई कि जो भी उबटन चंदन वह कंस के लिए ले जा रही थी, उसने सब कृष्ण को दिया। कुछ कहानियों के अनुसार  कृष्ण ने कभी त्रिविका से शादी भी की थी।

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