'मैं अकेला महसूस कर रही थी'

By: Sanya Ghai

कुछ टाइम से स्नेहा (15) को ऐसा लग रहा था जैसे उसके दोस्त उसे अनदेखा कर रहे हैं। उसे बुरा लगा पर वो समझ नहीं पा रही थी कि ऐसा क्यों हो रहा है। क्या उसे आगे बढ़ना चाहिए या उनसे और घुलने मिलने की कोशिश करनी चाहिए?

मैं अकेला महसूस कर रही थी

हम सात दोस्त हैं: त्रिशा, सिमरन, गुंजन, रशीत, दीपन, अंकिता और मैं। पिछले एक साल से मैं उन सभी के करीब हूं। सब रोज़ साथ में टाइम स्पेंड करते थे। लेकिन आजकल तो जैसे उन्हें मेरा वहाँ होना भी पसंद नहीं है।

कुछ हुआ?

मैं इंस्टाग्राम देख रही थी, जहां त्रिशा ने हमारी एक ग्रुप फोटो अपलोड करी थी, जिसमे मैं नहीं थी तब मुझे एहसास हुआ कि वो लोग अंकिता का बर्थडे मनाने मेरे बिना ही चले गए थे।

मैं गुस्से से लाल हो गयी, मैं उन पर चिल्लाना चाहती थी। मुझे समझ नहीं रहा था कि उन्होंने मेरे साथ ऐसा क्यों किया।

मैंने उन्हें फोन करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी मेरा फोन नहीं उठाया। मैं परेशान हो गयी। मैं इस सब में अपनी गलती ढूंढ रही थी। क्या इसलिए क्योंकि मैं उस नई लड़की कुहिका के करीब हो रही थी?  

क्या मैं एक अच्छी दोस्त नहीं हूँ?

मैंने माना कि मेरी गलती है मैं थोड़ी अलग हूँ। मुझे उन चीज़ों में मज़ा नहीं आता जो सिमरन, दीपन या औरों को पसंद आती हैं।

इसलिए, मैंने सोचा कि शायद मुझे उनके जैसा बनना चाहिए - शायद सिमरन की तरह कपड़े पहन कर या उनके फेवरेट कोरियन बैंड को पसंद कर कर, उनके साथ मिक्स-अप होकर शायद उनके लिए मेरी ज़रुरत फिर से बढ़ जाए।

अगले दिन, कुहिका ने मुझे लंच ब्रेक के दौरान उसके साथ बैठने के लिए बुलाया लेकिन मैंने उसे अनदेखा कर दिया। बल्कि मैं अपने दोस्तों के पास बैठने गई। मैंने सोचा मैं उनसे कोई सवाल नहीं करुँगी और उनके साथ घुलने मिलने की कोशिश करुँगी।

मैंने उनकी पसंदीदा चीजों के बारे में बात की और सिमरन से मैचिंग ब्रेसलेट भी पहना। कुछ दिनों तक उनके जैसा बनने की कोशिश करने के बाद भी, मुझे उनमे कोई बदलाव नहीं दिखा। मैं अभी भी अपने ही ग्रुप में एक अजनबी जैसा महसूस कर रही थी।

बल्कि वे मेरी कंपनी में चुप रहते थे। इस सब से मैं बहुत परेशान हो रही थी।

खुद के होने का डर नहीं

उस रात मैंने अपनी मैंने अपनी मम्मा को सब कुछ बताया क्योंकि मैं और हैंडल नहीं कर पा रही थी। मैं रोने लगी और उन्होंने मुझे गले लगा लिया।

"स्नेहा, जैसे तुमने मुझे अपनी भावनाओं के बारे में बताया, उन्हें बताओ कि उन्होंने तुम्हे कितना बुरा महसूस कराया। उनकी भी सुनो। हो सकता है कि सब ठीक हो जाए और तुम सब वापस दोस्त बन जाओ। और अगर ऐसा नहीं होता है, तो तुम्हारे पास एक मौका होगा, ऐसे दोस्त ढूंढ़ने का जो तुम्हारे साथ ऐसा बर्ताव ना करें और तुम्हे, तुम जैसी हो, वैसे ही पसंद करें। जैसे कुहिका, उसने मुझे कल तुम्हारे हाल पूछने के लिए कॉल किया था, क्योंकि उसे तुम्हारी चिंता है", उन्होंने कहा

अगले दिन, लंच ब्रेक के दौरान, मैंने अपने दोस्तों से बात करने का फैसला किया। मैंने उनसे पूछा कि वे मेरे साथ ऐसा बर्ताव क्यों कर रहे हैं?

त्रिशा ने आहें भरते हुए कहा, "हम जानते हैं कि तुम बहुत कोशिश करती हो लेकिन तुम हमारी जैसी नहीं हो!" 

"कोशिश!" उसे दिखावा कहना ज़्यादा सही रहेगा”, गुंजन ने गुस्से से कहा।

"हाँ, और हम ये भी जानते हैं कि तुम्हे बीटीएस भी नहीं पसंद!" उसने जोड़ा।

मुझे नहीं पता कि ये किसने कहा लेकिन उसके बाद मैंने "सिम्पल और बोरिंग" शब्द सुने।

यह सब सुनकर मुझे सच में बहुत बुरा लगा। मेरा मन हुआ कि मैं भी वो सारी चीज़े बोल दूँ जो मुझे उनके बारे में नहीं पसंद पर मैंने खुद को रोक लिया।

मैंने चुप रहना ही सही समझा। मैं अब उनके ग्रुप में नहीं रहना चाहती थी। बल्कि मैं तो अच्छा महसूस कर रही थी कि मैंने उन्हें अपनी बात बताई और सुना कि वो मेरे बारे मे क्या सोचते हैं।  

मैंने अपना टिफिन बॉक्स उठाया और जाकर कुहिका और उसकी दोस्तों के पास बैठ गई। उसने मुझे पास्ता ऑफर किया जो उसकी मम्मा ने बनाया था। पहला बाइट लेते ही ऐसी लगा जैसे मेरे ऊपर से बहुत बड़ा बोझ हट गया हो।

खुद के होने का डर नहीं

क्या आप कभी स्नेहा की स्थिति में आए हैं? आपने कैसा महसूस किया? क्या आपने इसके बारे में कुछ किया? नीचे कमेंट बॉक्स में हमारे साथ शेयर करें। याद रखें, कोई भी पर्सनल जानकारी कमेंट बॉक्स में डालें।

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