वो गणित से डरती नहीं थी!

By: Shreya Mishra

शकुंतला देवी विद्या बालन अभिनीत एक नई बायोपिक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शकुंतला देवी कौन थीं? किशोरों की मदद के लिए यहाँ है।

वो गणित से डरती नहीं थी

गणित को बनाया मज़ेदार 

शकुंतला देवी, अगर ये नाम पहले नहीं सुना था,तो अब तक तो ज़रूर सुन लिया होगा। शकुंतला देवी एक लेखक, एक प्रसिद्ध ज्योतिषी, एक सामाजिक कार्यकर्ता और एक गणित जादूगर थीं, जिन्हें गणित में विशेषज्ञता के लिए "मानव कंप्यूटर" का नाम दिया गया था।अगर आपने  ट्रेलर नहीं देखा तो आइये हम आपको बताते हैं।

ट्रेलर के शुरू में विद्या बालन, जिन्होंने शकुंतला देवी का किरदार निभाया है, एक मजेदार शिक्षक के रूप में दिखाई देती हैं। वह अपने छात्रों के साथ गणित के लिए अपना प्यार शेयर करने की कोशिश करती हैं। वह स्पष्ट रूप से अपने काम में जीनियस हैं क्योंकि जिस तरह से वह मैथ्स के बारे में बात कर रही थी, मुझे पहली बार गणित भी इंटरेस्टिंग लग रहा था। वह मुश्किल से मुश्किल वाले सवाल, सिर्फ अपने दिमाग से सोच के, कैलकुलेटर से भी तेज़ कर लेती थी।

एक जवाब में तो उन्होंने कंप्यूटर को भी अपनी कॅल्क्युलेशन्स से पीछे छोड़ दिया जिसकी वजह से उन्हें 'मानव कंप्यूटर ' का नाम भी दिया गया।

ये फिल्म हमे बताती है कि वह एक ऐसी बच्ची थी जो बिना किसी औपचारिक शिक्षा के मानसिक गणना कर सकती थी। एक मानव कंप्यूटर के रूप में अपने काम के अलावा, देवी एक प्रसिद्ध ज्योतिषी और कई पुस्तकों की लेखक भी थी, जिसमें कुकबुक, उपन्यास या गणित विषय के प्रति उनके प्रेम को दर्शाने वाली किताबें भी शामिल हैं।

गणित से कुछ बढ़कर

लेकिन ट्रेलर सिर्फ उनकी गणित की प्रतिभा के बारे में नहीं है, बल्कि गणित जीनियस के अलावा वो एक पत्नी और माँ का रोले भी निभा रही हैं। और वैसे भी हर बॉलीवुड फिल्म बिना थोड़े ड्रामे के अधूरी है क्यों! जैसा कि विद्या बालन ने ट्रेलर में खुद कहा हैं, “हम भारतीय ऐसे ही होते हैं। या तो ड्रामा या कुछ नहीं।”

ड्रामा में मां-बेटी की जोड़ी के खट्टे-मीठे संबंध शामिल हैं, जिसमे उनके बीच की दूरियाँ तो दिखाई हैं पर वहीं उनके बीच कुछ अच्छे और ख़ुशी के पल भी दिखाए हैं। विद्या बालन की मजाकिया टिप्पणी और और गणित का ज्ञान देखकर मुझे यह फिल्म देखने का और भी मन कर रहा है।

नॉर्मल क्यों बनूँ 

1977 में उन्होंने ‘द वर्ल्ड ऑफ होमोसेक्सुअल’ किताब लिखी – जो भारत में होमोसेक्सुएलिटी का पहला अध्ययन है और अपने समय से काफी आगे था। उनका शादी एक होमोसेक्सुअल पुरुष से हुई, और शायद यही कारण था कि उनकी इस विषय में रूचि बनी। उन्होंने होमोसेक्सुएलिटी को बहुत पॉजिटिव तरीके से दर्शाया और भले ही उस समय में उन्हें ऐसा करने के लिए गलत माना गया पर आज इसलिए वह इस क्षेत्र में बहुत बड़ी हस्ती मानी जाती हैं। 

वह 83 साल की उम्र तक जीवित रही और अपने जीवन काल में जहाँ भी गई अपने देश का नाम रौशन करती रही और अपनी फिल्म की लाइन "नार्मल क्यों बनूँ ,जब अमेजिंग हो सकती हूँ तो" को हर तरह से सही साबित किया।

नॉर्मल क्यों बनूँ

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