‘स्टाइल से ऊपर कम्फर्ट’

By: Umeza Peera

मानवी (16) को फैंसी कपड़े पसंद नहीं हैं और वह स्टाइल से ज़्यादा आराम पसंद करती है। लोग उसे 'टॉमबॉय' कहते हैं - ये उसे बहुत परेशान करता है। उसने अपनी फीलिंग्स टीनबुक के साथ शेयर की।

स्टाइल से ऊपर कम्फर्ट

फोटो: अडोबे स्टॉक/रोक्विलो 

ये मिस्टर टॉम कौन है? 

मैं बचपन से ही दो भाइयों के साथ बड़ी हुई, तो उनके जैसी ही जिंदगी भी जी । मैंने कभी भी खेलने के लिए डॉल नहीं माँगी। मैं मांग किया करती थी स्केटबोर्ड की और भाईयों के साथ मिट्टी में लड़ाई और फुटबॉल खेलने में मुझे बहुत मज़ा आता था।

जब भी मेरी माँ मुझे ड्रेस या फ्रॉक पहनाती तो मुझे बहुत असहज महसूस होता। मैं उसमे ढंग से खेल भी नहीं पाती थी और टॉप मुझे बहुत टाइट लगते थे। मुझे तो बस उन्हें उतारकर कुछ आरामदायक पहनने के मन करता।

आज तक, मेरी माँ मुझे ‘लड़की की तरह’ बनने के लिए कहती है - मुझे तो इसका मतलब भी समझ नहीं आता। ये बात वो मुझसे अलग-अलग तरीकों से कहने की कोशिश करती हैं। जैसे "मानवी, तुम लंबे बालों में कितनी अच्छी लगती थी, तुम फिर से बाल क्यों नहीं बढ़ाती?" 

मैं हमेशा उनकी ऐसी मांगो को सीधे सीधे मना कर देती हूँ। ऐसी बातें मुझे हमेशा से ही बहुत बुरी लगती हैं। लोग हमेशा से मुझे 'टॉमबॉय' कहते हैं। आखिर ये मिस्टर टॉम है कौन? 

अजीब बदलाव?  

जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मैं लोगों की बातें और नज़रे अनदेखा कर, अपनी पसंद के कपड़े पहनने लगी। मैं अपने कपड़े अपना आराम देख कर चुनती थी और स्टाइल पर ज़्यादा ध्यान नहीं देती थी। सारी लड़कियों को गुलाबी और ग्लिटर पसंद हो, ये ज़रूरी तो नहीं है ना? कम से कम मुझे तो नहीं! 

मुझे जींस, शर्ट, टीज़, पैंट पसंद हैं और ड्रेस से ज़्यादा ट्रैक सूट पसंद हैं। यह मेरे लिए आरामदायक है। मुझे स्टाइल से ज़्यादा आराम पसंद है और मैं चाहती हूँ लोग मुझे वैसे ही स्वीकार करें। वो मुझे इसके लिए टॉमबॉय क्यों कहते हैं, मुझे समझ नहीं आता। 

मेरी क्लास की लड़कियाँ, मुझे देख कर हँसती हैं। मुझे तो लगता है लड़का होना कितना अच्छा है, वो हमेशा ही आरामदायक कपड़े पहनते हैं। 

शुरू में मेरी माँ को लगा मैं किसी अजीब बदलाव से गुज़र रही हूँ और ये बस थोड़े समय की बात है। उन्होंने मुझे बहुत से गाउन, राजकुमारी वाली ड्रेस, और सिंड्रेला वाले जूते दिला कर बहलाने की कोशिश की पर अब वो भी हार मान चुकी हैं। आख़िरी बार उन्होंने मुझे एक पर्पल जैकेट दिया था! 

मैं अब बास्केटबॉल खेलती हूँ, जब भी मुझे मौका मिलता है मैं अपने भाई की बाइक सीखने का आनंद लेती हूँ और ज्यादातर स्नीकर्स पहनती हूँ क्योंकि वो बहुत आरामदायक होते हैं। 

अलग-थलग  

जब दोस्त बनाने की बात आई, तो मैं हमेशा लड़कों के साथ अधिक सहज थी और उन्होंने मुझे लड़कियों से बेहतर समझा। 8वीं कक्षा में, कई लड़कियों ने मतलबी बातें कहकर मुझे धमकाने की कोशिश की और कई ने मुझसे बात करना बंद कर दिया क्योंकि मैं दूसरी लड़कियों से अलग थी। मेरे साथ अलग व्यवहार किया गया। 

मुझे लड़कों के साथ दोस्ती करने और उनके साथ खेलने के लिए भी अजीब नामों से बुलाते थे। लेकिन अब मैं उस सब से परेशान नहीं होती। मैं आकाश, सुमित, करण, मिहिर और बाकियों के लिए बहुत शुक्रगुज़ार हूँ कि उन्होंने मुझे अपना माना और कभी भी उनसे अलग महसूस नहीं कराया।

हालाँकि, कभी कभी मैं बहुत उदास हो जाती हूँ जब मेरे आस-पास के लोग कहते हैं,"ऐसी रहोगी तो लड़का कैसे मिलेगा?" मेरा तो मन करता है ज़ोर से उन्हें अपना काम से काम रखने को बोल दूँ! 

एक छोटी सी कीमत 

मुझे हमेशा लगता था कि मेरे साथ कुछ गड़बड़ है क्योंकि हर कोई ऐसा कहता रहा। लेकिन समय के साथ, मुझे एहसास हो गया है कि मैं ऐसी ही हूँ। मेरे साथ कुछ गलत नहीं है। मैंने स्टाइल से ऊपर कम्फर्ट को चुना और डांस या गानो के ऊपर  स्पोर्ट्स को। सबके पास अपनी चॉइस होती है! 

अब मुझे समझ में आ गया है कि ये सभी चीजें मुझे खुश करती हैं और मुझे किसी और के लिए खुद को बदलना नहीं चाहिए, चाहे वो कोई भी हो। अपनी पसंद की चीज़े करने से मैं खुश रहती हूँ और इस तरह मैं अपनी पढ़ाई पर भी अच्छे से ध्यान दे पाती हूँ और अपने आस-पास की चीज़ो का मज़ा भी अच्छे से ले पाती हूँ। 

अगर लोग मुझे 'टॉमबॉय' कहते हैं तो वही सही। ये एक छोटी सी कीमत है जो मैं अपने खुश रहने के लिए चूका सकती हूँ, है ना?

एक छोटी सी कीमत

क्या आप कभी  ऐसी स्थिति में आए हैं? आपने कैसा महसूस किया? क्या आपने इसके बारे में कुछ किया? नीचे कमेंट बॉक्स में हमारे साथ शेयर करें।याद रखें, कोई भी व्यक्तिगत जानकारी कमेंट बॉक्स में न डालें। 

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