PUBG की लड़ाई: माता-पिता और टीनएजर्स के बीच!

By: Sanya Ghai

विनर विनर, चिकन डिनर! कुछ याद आया? काफी समय हो गया है टीनएजर्स को ये मैसेज अपने फ़ोन की स्क्रीन पर देखे हुए। (कोई बात नहीं, अब रोते नहीं!) कुछ समय पहले PUBG को भारत में बैन कर दिया गया था। लेकिन जहाँ एक तरफ टीनएजर्स इसका शोक मना रहे है वही उनके मम्मी-पापा ख़ुशी से झूम रहे हैं! एक टीनएज गेमिंग प्रशंसक सान्या, सोचती है कि क्या पीढ़ियों की इस लड़ाई में कोई बीच का रास्ता बन सकता है!

PUBG की लड़ाई: माता-पिता और टीनएजर्स के बीच!

चिकन का फैन

प्लेयर अननोन बैटलग्राउंड, जिसे PUBG [भगवान उसकी आत्मा को शान्ति दे :(] के नाम से जाना जाता है, एक ऑनलाइन बैटल रॉयल गेम है। कई टीनएजर्स इस गेम को खेल कर अपना खाली समय गुजारना पसंद करते थे। इस गेम ने मेरे दोस्तों की भी मदद की और मुझे पढ़ाई के स्ट्रेस से कुछ राहत भी देता था। बहुत अच्छी क्वालिटी के ग्राफ़िक्स और एनिमेशन्स की वजह से इसको बहुत से गेमर्स पसंद करते थे।

इस स्लोगन "विनर विनर, चिकन डिनर" को देखने की ख़ुशी और संतुष्टि ही इस गेम को खेलने की सबसे बड़ी वजह है। अपने दोस्तों के साथ खेलने से लेकर ऑनलाइन टूर्नामेंट में भाग लेने तक, PUBG अपने गेमर्स के लिए किसी खेल से कम नहीं था! उसे खेलने का एड्रेनलिन और जीतने के संघर्ष का कोई मुक़ाबला नहीं कर सकता है (या था)!

लेकिन 2 सितंबर 2020 को, भारत सरकार ने सुरक्षा चिंताओं के कारण इस गेमिंग ऐप पर बैन लगा दिया। और बस ऐसे ही "विनर विनर, चिकन डिनर " कहीं खो गया!

अफ़सोस! अब परफेक्ट लैंडिंग या प्लेन से कूदकर पोचिंकी और जॉर्जोपोल जैसे लोकप्रिय स्थानों पर जाना अब नहीं हो सकता । दोस्तों को मैसेज करना ,"PUBG के लिए रेडी?" या "PUBG खेलेगा/खेलेगी?" अब नहीं होता।  

इस तरह की स्थिति में गेमर्स के पास दूसरे गेमिंग प्लेटफॉर्मो पर जाने के अलावा कोई चारा नहीं बचता। इनमे कॉल ऑफ़ ड्यूटी, फ़ोर्टनाइट, फ़ॉल गाय, अमंग अस जैसे कुछ नाम है! लकिन मुझे अभी भी PUBG  की याद आती है:-(

माता-पिता के लिए राहत!

हालाँकि, बैन कुछ (या ज़्यादातर) माता-पिता के लिए एक राहत है। क्यों? बहुत सारे माता-पिता महसूस करते हैं कि वीडियो गेम पढ़ाई से ध्यान भटकाते हैं। चाहे टीनएजर्स कितना ही मना करे, वो उनकी पढ़ाई पर असर डालने लगता है; खासकर तब जब वो लम्बे समय तक खेला जाए।

कुछ बच्चे अपने टाइम को ठीक तरह से नहीं बाँट पाते हैं और इस वजह से दूसरी गतिविधियाँ भी सही से नहीं कर पाते हैं। माता-पिता तो चिंतित होंगे ही!

कई माता-पिता यह भी महसूस करते हैं कि ये खेल उनके बच्चों को हिंसक बना देगा (ऐसा कई केस स्टडीज़ में भी कहा गया है)।

लेकिन, जो माता-पिता को नहीं पता होता, वो यह है कि ऐसे गेम्स बच्चों की एनालिटिकल स्किल्स को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। झाड़ियों में छिपने से लेकर दुश्मन पर हमला करने के के अलग अलग तरीकों के बारे में सोचने तक, ये गेम कंसंट्रेशन भी बढ़ाता है!

गेम में जिस तरह का संगीत पीछे चलता है वो भी गेमर्स का कंसंट्रेशन बढ़ाने के लिए भी होता है!

बीच का रास्ता

तो गेमर्स और उनके माता-पिता के बीच इस लड़ाई में अगला कदम क्या है? नए ऑनलाइन गेम का सहारा लेने वाले टीनएजर्स को अपने माता पिता के साथ मिलकर एक बीच का रास्ता/ हल  ढूंढना पड़ेगा।

इसका हल है आप में बातचीत । दोनों पक्षों (पेरेंट्स और बच्चे) को मिलकर आपस में बात करनी होगी। जो एक चैट के रूप में भी जाना जाता है! वे आपकी बात सुने और बदले में आप भी ध्यान दे कि उन्हें क्या कहना है। दोस्तों की तरह?

PUBG के एक मैच को जीतने का जो उत्साह होता है, बच्चे माँ पापा को समझाने की कोशिश करें। इसी तरह जब वो आपको ( पेरेंट्स को) अपनी चिंताओं के बारे में बताएँ तो उन्हें भी समझें। इससे आप दोनों को एक दूसरे को समझने में मदद मिलेगी।

PUBG के चले जाने के बाद, उस बचे हुए समय में अपने माता पिता से बात करें। क्या पता आप वास्तव में एक ऐसे समझौते पर एग्री कर लें जो खुद में एक जीत है। जिसमे आप खेल भी पाए और साथ ही दूसरी चीज़ों पर भी ध्यान दे पाएं।

और क्या पता आपको अपने असल ज़िन्दगी में भी एक चिकन डिनर मिल जाए (शाकाहारी दोस्तों- माफ़ करना!)।

बीच का रास्ता

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