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मैगज़ीन

मेरे मम्मी पापा मुझे ऑनलाइन दोस्त नहीं बनाने देते!

हे दिशा, मेरी मम्मा ऑनलाइन दुनिया के बिल्कुल खिलाफ हैं! वह सोचती है कि मेरे सभी ऑनलाइन दोस्त नकली हैं और मुझे किसी से भी ऑनलाइन बात नहीं करनी चाहिए। मेरे पापा ने भी मुझसे डिस्कॉर्ड ऐप डिलीट करने के लिए कहा है जो उन्होंने उस दिन मेरे लैपटॉप पर देखा था! मेरा मतलब है, यह भी कोई बात हुई? मेरे वो ही तो दोस्त है! अर्पण, 14, कानपुर।

एंटी-सोशल क्लब ब्रो!

तो सबसे पहले तो मैं तो मै समझती हूँ अर्पण और मुझे लगता है आज कल के सभी टीन इसे और अच्छे से समझ सकते हैं। अरे अपने ऑनलाइन फ्रेंड सबको दिखाने का तो बीच में ट्रेंड भी बना था ब्रो, जिससे साफ़ पता लगता है कि इंटरनेट पर काफी लोगों ने बहुत अच्छे दोस्त बनाए हैं। अरे मुझे ही देख लो, मेरी तो एक पुराने दोस्त से इंटरनेट पर दोस्त हुई जिससे मेरी स्कूल में बात भी नहीं होती थी। मम्मी पापा भी न एकदम एंटी-सोशल क्लब हैं ब्रो!

इस विषय पर और जानने के लिए नीचे दिए गए वीडियो को देखें। बाकी का आर्टिकल वीडियो के नीचे हैः

तो मुद्दे की बात ये है जज साहब की मैं  समझती हूँ। पर मैं तुम्हारे माँ-पापा की बात भी समझती हूँ। और इससे पहले की तुम्हारी ट्रैन सीधा “अरे यार फिर लेक्चर” के स्टेशन पर पहुँच जाए। रुको ज़रा सब्र करो। अगर तुम उनके नज़रिये से देखो तो आज कल साइबर क्राइम बहुत ही डरावने हो सकते हैं।

हाँ, तुम्हारे ऑनलाइन दोस्ती के अनुभव काफी अच्छे रहे होंगे पर हर किसी के साथ ऐसा नहीं होता लक्ष्मण। और इस सिक्के का दूसरा पहलु काफी डरावना है और तुम्हारे पेरेंट्स सिर्फ तुम्हे उससे बचाना चाहते हैं। इसलिए उनकी बात को भी समझने की कोशिश करो। और एक बार ऐसा करने के बाद, मुझे लगता है कि तुम दूसरे लेवल के लिए तैयार हो जाओगे जो है उन्हें अपना पक्ष बताना।

अच्छा पक्ष दिखाओ

देखो एकदम सिंपल है। वो रोज़ न्यूज़ में अगर साइबर क्राइम के बारे में सुनेंगे तो इस बारे में उनकी राय बन ही जाएगी। अब तुम्हारा काम है उन्हें इस सब का वो अच्छा हिस्सा दिखाना जो तुमने देखा है। तुम्हे उनकी उस राय को सुधारना है। उन्हें बताओ कि तुमने वहाँ कितने अच्छे दोस्त बनाए और कैसे उन्होंने तुम्हारी मदद की। उन्हें दिखाओ की इंटरनेट कभी कभी एक अच्छी जगह भी हो सकती है।

उन्हें किसी ऐसे दोस्त के बारे में बताओ जिसे वो पहले से जानते हों और जिसे आप ऑनलाइन मिले। उन्हें बताओ की कैसे वो दोस्त आपका हमेशा साथ देता है और उसका आप पर एक अच्छा प्रभाव भी पड़ा। शायद उसने तुम्हारी पढ़ाई में मदद की हो। हाँ इसमें थोड़ा समय लग सकता है पर वे ज़रूर समझेंगे।

लेकिन हाँ, सिर्फ इसलिए कि वे अब तुम्हारी बात भी समझते हैं इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ ठीक है। तुम्हें अभी भी इंटरनेट पर सावधान रहना होगा। व्यक्तिगत जानकारी, पासवर्ड या तस्वीरें किसी के साथ शेयर न करो। ऑनलाइन लोगों के साथ तुम्हारा बहुत अच्छा अनुभव रहा है, तो चलो इसे ऐसे ही रखते हैं।

दुनिया बाहर है

ऑनलाइन समय बिताना अच्छा है, लेकिन तुम्हें बाहर निकल कर भी दोस्त बनाने होंगे। रियल लोगों से मिलो और बातचीत करो। अब तुम सोचोगे क्यों। देखो अभी तो तुम स्कूल में हो, उसके बाद कॉलेज आएगा और उसके आगे लाइफ़ ! 

पर अगर तुम सिर्फ ऑनलाइन पर ध्यान दोगे तो असली फन कब तुम्हारे सामने से निकल जाएगा, तुम्हे पता भी नहीं चलेगा। वहाँ आर्ट, गाना, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल जैसे कई सारे क्लब्स होते हैं जिनका तुम हिस्सा बन कर नई नई चीज़ें सीख भी सकते हो और नए दोस्त भी बना सकते हो। 

एड्रेनालाईन रश की तरह (जब तुम कोई खेल खेलते हो या किसी गतिविधि में शामिल होते हो तो तुम्हे एक सुखद एहसास होता है) सिर्फ ऐसी गतिविधि के बाद मिलता है जिसमें  हम खुद भाग लें, और उसे कोई नहीं हरा सकता है! और स्कूल और कॉलेज के दोस्तों के साथ घूमना तुम्हें  कई सारी अच्छी यादें दे सकता है। आखिर यही बातें तो बाद में याद आएँगी! और ये सब ऑनलाइन नहीं मिल सकता। 

यहाँ तक ​​​​कि अगर मज़े को साइड भी रख दें तो भी नए लोगों से सामने मिल कर उनसे घुलना मिलना बहुत ज़रूरी है क्योंकि जब आगे चलकर तुम किसी नौकरी या इंटरव्यू के लिए जाओगे – तो ये बहुत मायने रखता है कि तुम टीम में कैसे काम करते हो और लोगों  के साथ किस तरह बर्ताव करते हो। अब तुम अपने साथ काम करने वाले लोगों से टेक्स्ट करने को तो नहीं कह सकते ना!

तो बस! ऑनलाइन रहो दोस्त बनाओ पर अपने असल दोस्तों को मत भूलना। आज के लिए इतना ज्ञान काफी है। मुझे उम्मीद है तुम अपने माँ-पापा को मना लोगे।

फोटो: शटरस्टॉक/फोटो में व्यक्ति एक मॉडल है, नाम बदले गए हैं।

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#AskDisha एक सलाह कॉलम है जिसे टीनबुक की एडिटोरियल टीम चलाती है। यहाँ पर दी गई सलाह साइंस पर आधारित मगर सामान्य रूप की है। टीनएजर्स और उनके माता पिता को ख़ास व्यक्तिगत मामलों में सिर्फ प्रोफेशनल की सलाह लेनी चाहिए

माता-पिता किशोरों को क्यों नहीं समझते हैं, इस पर हमारे टीनबुक के पॉडकास्ट को सुनना न भूलें: 

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